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दिल्ली में 'हजारों की वसूली' के बदले मिल रही मौत, देखें PG की इनसाइड LIVE पड़ताल

 Reported By: Anamika Gaur,  Written By: Amar Deep
 Published : Sep 07, 2026 02:01 pm IST,  Updated : Sep 07, 2026 02:17 pm IST

दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में मकान गिरने से सात लोगों की मौत हो गई। इस मकान में पीजी संचालित हो रही थी, जिसमें कई छात्र भी रहते थे। ऐसे में इंडिया टीवी की टीम ने इलाके में बने अन्य पीजी की हालत जानने के लिए पड़ताल की।

दिल्ली के पीजी के हालात की इनसाइड पड़ताल।- India TV Hindi
दिल्ली के पीजी के हालात की इनसाइड पड़ताल। Image Source : INDIA TV

दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में रविवार को एक पांच मंजिला इमारत गिर गई। इस घटना के बाद मलबे में दबने से अब तक सात लोगों की मौत हो गई है। इंडिया टीवी की टीम लगातार मौके पर मौजूद है। इस बीच हमारी टीम ने इस इलाके में बने अन्य पीजी की इनसाइड पड़ताल की। इसी क्रम में हम घटनास्थल के ठीक सामने की एक बिल्डिंग में पहुंचे, जो कि एक पांच मंजिला इमारत है, जिसे किराए पर दिया जाता है। यहां इंडिविजुअल कमरे यानी सिंगल कमरे दिल्ली यूनिवर्सिटी में पढ़ रहे छात्रों को दिए जा जाते हैं। बिल्डिंग में पहुंचने पर पता चला कि इसकी सीढ़ियां संकरी तरीके से बनाई हुई हैं। इसमें एक ही एंट्री और एक ही एग्जिट है। यानी फायर के जो नियम हैं, उनका उल्लंघन किया गया।

17000 रुपये के कमरे में सुविधा जीरो

पड़ताल के क्रम में हमारी टीम एक छात्र के कमरे में पहुंची, जहां पता चला कि यह एक दिल्ली यूनिवर्सिटी में पढ़ने वाले छात्र का रूम है। यह डबल शेयरिंग रूम गै, जिसमें दो छात्र रहते हैं। कमरे में ही छोटा सा किचन दिया गया था और आरओ लगा हुआ था। यहां रहने वाले छात्र शारांश विश्वकर्मा ने बताया कि वह दिल्ली यूनिवर्सिटी के छात्र हैं। उन्होंने बताया कि पूरी बिल्डिंग में इसी तरह से किराएदार रह रहे हैं। इस कमरे में पर बेड 8000 का किराया लगता है। यानी दो बेड वाले इस कमरे का किराया लगभग 17000 रुपये था। वहीं सुविधा के नाम पर यहां केवल एक पानी की टंकी और एक स्लैब डालकर कमरे के अंदर ही किचन बना दिया गया।

सेफ्टी के इंतजाम नहीं

इस पीजी के हालात की बात करें तो यहां पर सेफ्टी के कोई इंतजाम नहीं मिले। जो ऊपर आने वाली सीढ़ियां थीं, वो इतनी छोटी थीं कि वहां से अगर कुछ भगदड़ जैसे हालात होते हैं या कुछ दुर्घटना होती है तो दो से तीन लोग एक साथ उन सीढ़ियों से नहीं गुजर सकते। छात्र शारांस के मुताबिक अब इस हादसे के बाद उन्हें भी यहां रहने से डर लगने लगा है। उन्होंने कहा कि इस इलाके से मूव होने की बात दिमाग में तो चल रही है, लेकिन कहां जाएंगे। ये इलाका कॉलेज से पास है तो इसलिए यहां रहना सुविधाजनक पड़ता है।

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